नाकामी सरकार की भुगतेंगे छात्र!


UGC द्वारा परीक्षा करवाने के पीछे का सच अब आया सामने।

नमस्कार दोस्तों,

 विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC । पिछले कुछ दिनों से UGC द्वारा बार बार परीक्षा करवाने के लिए विश्वविद्यालयों पर दबाव बनाने का सिलसिला जारी रहा है अब यही दबाव वह सुप्रीम कोर्ट पर भी बनाने का प्रयास कर रही है क्योंकि अंतिम वर्ष की परीक्षा नही करवाने को लेकर पुरे देश के विभिन्न राज्यों से 31 छात्रों ने Adv. Alakh Alok Shrivastav के नेतृत्व में  UGCऔर  MHRD के खिलाफ याचिका दायर की थी जिसमें सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने UGC को अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया जिसमें सुनवाई के दौरान UGC ने कहा कि वे किसी भी हाल में अन्तिम वर्ष के छात्रों को बिना परीक्षा प्रमोट नहीं करेंगी और जहां परिस्थितियां ठीक है वहां 30 सितंबर से पूर्व परीक्षा करवाने का आदेश दिया एवं जहां परिस्थितियां ठीक नहीं है वहां भी बाद में परीक्षा लेना अनिवार्य किया गया है और UGC द्वारा कड़ा रुख अपनाते हुए छात्रों को भी कहा कि ' वे इस गलतफहमी में ना रहे की  अदालत में मामला होने से परीक्षा नहीं होगी , तैयारी करना शुरू कर दें परीक्षा हर हाल में होगी' । UGC का फैसला सुनकर सुप्रीम कोर्ट ने भी कोई फैसला ना देते हुए कहा कि परीक्षाओं पर फैसला गृहमंत्रालय द्वारा लिया जाना चाहिए यह सब पर फैसला अब गृहमंत्रालय के पास सुरक्षित कर  दिया गया है जिस पर 10 अगस्त तक जवाब मांगा गया है।
                                                                                                                                                                                                                                                                               अब छात्र इस भंवर में फंसे हुए हैं कि जब परीक्षा करवाने के लिए गृहमंत्रालय ने ही MHRD और  UGC को आदेश दिया था तो सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने का क्या मतलब हुआ आखिर क्यों कोर्ट फैसला लेने के लिए स्वतत्र नहीं है ?             क्या न्याय का ये मन्दिर भी राजनीति के लिए बन गया है? 
                                                                                                                                                                 इस मामले को गंभीरता से लेते हुए देश के एक विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति "अनाम" ने कहा कि परीक्षा करवाने के पीछे मोदी सरकार UGC की आड़ में देश में बढ़ती बेरोजगारी को छुपाने का प्रयास कर रही है उन्होंने कहा कि इन हालातो में परीक्षा करवाने के बारे में सोचना भी छात्रों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने जैसा होगा और जून के महीने में जब खुद MHRD मिनीस्टर डां रमेश पोखरियाल निशंक जी भी परीक्षा रद्द करवाने के पक्ष में थे और उन्होंने UGC को किस आधार पर प्रमोट करना है इस पर विचार करने तक को बोल दिया था कि तब कुछ राज्यों ने इस विश्वास के आधार पर अपने अपने राज्यों में प्रमोट भी कर दिया तभी अचानक गृहमंत्रालय से आदेश आया कि परीक्षा करवाई जाए ऐसा क्यों? और प्रमुख रुप से अंतिम वर्ष की क्यो? यदि करवानी है तो सभी वर्ष के छात्रों की करवाओ परीक्षा। 
                                                         दरअसल सभी परीक्षा के मामले में  UGC को दोषी ठहरा रहे हैं। वे तो आदेश का पालन कर रहे हैं इस बारे में कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को पत्र लिखे यहां तक कि वर्चुअल विडियो मीटिंग में भी प्रधानमंत्री जी को अवगत कराया। परन्तु प्रधानमंत्री जी भी खामोश है । अभी तक इस पर कोई विचार नहीं किया गया।
 UGC  द्वारा परीक्षा करवाने की मुख्य वजह अभी तक किसी ने भी नहीं कही आखिर क्यों UGC कोरोना जैसी महामारी के समय परीक्षा करवाना चाहती है मै चिंतित हूं कि अभी तक इसके पीछे का सच कोई समझ ही नहीं पा रहा है सब एक ही बात कह रहे हैं ।

दरअसल पिछले 7 साल जब से BJP सरकार द्वारा शासनकाल में बेरोजगारी का ग्राफ किस तरह बढ़ा है इस और किसी का भी ध्यान नही गया और इसी बेरोजगारी को छुपाने के लिए UGC द्वारा परीक्षा करवाई जा रही है
इसके पीछे की सच्चाई यह है कि हर वर्ष पुरे देश में 47-53% से भी कम छात्र ग्रेजुएट होते हैं उन स्थितियों में ही भारत में बेरोजगारी इतनी बड़ी हुई तो आप आकलन कर सकते हैं कि जब कोरोना में छात्रों को प्रमोट किया जाएगा तो यह आंकड़ा 100% होगा अर्थात गत वर्ष की तुलना में दुगुना।
 जब इतनी बड़ी संख्या में छात्र ग्रेजुएट होंगे तो बेरोजगारी की दर कितनी होगी इसका आकलन आप लगा सकते हो प्रतिवर्ष यह दर औसतन 4-5% बढ़ोतरी हो रही है और उसी बेरोजगारी को ना बढ़ाने के लिए गृहमंत्रालय द्वारा UGC को परीक्षा करवाने का आदेश दिया गया क्योंकि सरकार रोजगार देने में असमर्थ हैं । यह सबसे बड़ी नाकामी रहीं हैं इस सरकार की।अपनी इस नाकामी से सरकार हर जगह फैल है और इसी सच्चाई को छुपाने की कोशिश  परीक्षा करवा कर की जा रही है क्योंकि इस से कई छात्रों का परिणाम सही नहीं होगा जिससे वे ग्रेजुएट नहीं हो पाएगे और बेरोजगारी में एक साथ बढ़ोतरी नहीं होगी।
नाकामी सरकार की भुगतेंगे छात्र।
                                                   अन्त में मैं बस यही कहुंगा कि छात्रों को  गांधीवादी तरीके से विजय पाना मुश्किल है सरकार आपकी सुनें उसके लिए भगतसिंह बनना पड़ता है और इसी का आधार बनने के लिए छात्र संगठन बनाए गए हैं उन सभी को संगठित होकर आगे आना चाहिए।                                                                                                                                      इस न्यूज़ को अधिक से अधिक लोगों के पास शेयर करो ताकि हर छात्र इस न्यूज़ को प्राप्त कर सके                                                                                    अगर आपको भी यूजीसी द्वारा लिया गया एग्जाम कराने का निर्णय गलत लगता है तो हमें कमेंट सेक्शन में कमेंट करके जरूर बताएं                               UGC Guidelines for University Exams 2020: UGC New Guidelines for ...

Comments

  1. Aap sahi he sarkar hi berojgar he to fhir vo kya studenrs ko rojgar degi

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